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Vighatan
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Vighatan

Forfatter:
Hindi
भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ सर्वाधिक युवाशक्ति है और 2020 तक भारत की साठ प्रतिशत जनसंख्या कार्यकारी आयुवर्ग की होगी। देश के परिवर्तन और कायाकल्प का एक बहुत बड़ा अवसर है। युवा अपनी नयी सोच और दृष्टिकोण से एक नये और विकासोन्मुख समाज व देश की रचना कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि उनमें योग्यता, कुशलता, सही निर्णय लेने की क्षमता और ठोस विकल्प हों। आज के युवाओं पर केन्द्रित यह उपन्यास इसी ज्वलन्त प्रश्न को उठाता है। बढ़ते बाज़ारीकरण, बदलती राजनीति और धर्म के उलझे धागों से रचा समाज क्या भारतीय युवाओं की महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा होने का अवसर प्रदान करेगा। ऐसे ही संघर्ष की कथा वरिष्ठ लेखक जयनंदन ने लिखी है। राधाकृष्ण पुरस्कार, बिहार राजभाषा सम्मान और कई साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित लेखक जयनंदन का यह चौथा उपन्यास है। इससे पहले वह कई कहानी-संग्रह और नाटक लिख चुके हैं।
Forfatter
Jainandan
ISBN
9789350641453
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
1.12.2017
Antall sider
288