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Subhadra Kumari Chauhan Ki Samagra Kahaniyan  (Edition1st)
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Subhadra Kumari Chauhan Ki Samagra Kahaniyan (Edition1st)

सुभद्रा कुमारी चौहान (1904-1948) हिन्दी साहित्य की एक सुप्रसिद्ध लेखिका और राष्ट्रीय चेतना की कवयित्री थीं, जिन्होंने कविता के साथ-साथ कथा साहित्य में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी कहानियों का 'समग्र' संकलन उनकी व्यापक कथा-दृष्टि को प्रस्तुत करता है।
मुख्य संग्रहः उनकी कहानियाँ मुख्यतः तीन कहानी संग्रहों में संकलित हैं
1. बिखरे मोती (1932)
2. उन्मादिनी (1934)
3. सीधे साधे चित्र (1947)
विषयवस्तु और शैलीः सुभद्रा कुमारी चौहान ने 46 कहानियाँ लिखीं, जिनमें राष्ट्रीय आंदोलन, पारिवारिक और सामाजिक जीवन, विशेषकर नारी विमर्श पर जोर दिया गया है। उनकी कहानियों का मुख्य स्वर भारतीय समाज और परिवार का यथार्थ चित्रण है। उनकी अनेक कहानियों में स्वाधीनता संग्राम के दौरान उनके जेल जीवन की अनुभूतियाँ भी परिलक्षित होती हैं।
उनकी भाषा सरल, सहज और आडम्बरहीन खड़ी बोली है। उनकी शैली वातावरण-चित्रण प्रधान है, जिसमें एक काव्यात्मक सादगी है जो सीधे पाठक के हृदय को स्पर्श करती है। 'राही', 'पापी पेट' और 'मंझली रानी' जैसी कहानियाँ उनकी मानवीय संवेदना और यथार्थवादी दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।
समग्र कहानियों का यह संकलन उन्हें एक लोकप्रिय कथाकार के रूप में स्थापित करता है, जिनकी रचनाओं में देशप्रेम, नारी-स्वाधीनता और सामाजिक समस्याओं का मुखर चित्रण मिलता है।
ISBN
9789374769454
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
28.11.2025
Antall sider
274