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Sarla ek Vidhwa Ki Atmkatha ????
Spar

Sarla ek Vidhwa Ki Atmkatha ????

Forfatter:
pocket, 2026
Hindi
दिल जले है गम से औ, आंसू बहाना मना है, आग घर में लग रही है औ, बुझाना मना है। है जिगर में शोला औ नालः उठाना मना है, चाक पर है चाक औ मरहम लगाना मना है। स्त्री-पुरुष के रिश्तों पर सबसे निराले इस पुस्तक में आत्मकथाकार सरला एक ऐसे स्वर्ग की कल्पना करती है, जहाँ स्त्री-पुरुष की हैसियत में कोई फर्क नहीं है और दोनों बराबर आजादी के साथ जिंदगी जीते हैं।
Undertittel
?? ????? ?? ??????? (Hindi Edition)
Forfatter
Dukhinibala
ISBN
9781715318581
Språk
Hindi
Vekt
86 gram
Utgivelsesdato
6.1.2026
Forlag
Blurb
Antall sider
78