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Premchand Ki Samgra Dalit Kahaniyan (Edition1st)
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Premchand Ki Samgra Dalit Kahaniyan (Edition1st)

मुंशी प्रेमचंद (धनपत राय श्रीवास्तव) को भारतीय साहित्य में 'कथा सम्राट' के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपनी लेखनी का उपयोग सामाजिक क्रांति और यथार्थवाद के लिए किया। 'प्रेमचंद की समग्र दलित कहानियाँ' का संकलन उनके व्यापक सामाजिक सरोकार का प्रमाण है, जो उस समाज की मार्मिक गाथा प्रस्तुत करता है जिसे जातिगत भेदभाव और आर्थिक शोषण ने सदियों से दबा रखा था।
इन कहानियों में प्रेमचंद ने दलित समुदायों के जीवन की कटु सच्चाइयों को बेबाकी से चित्रित किया है। वे न केवल उनकी गरीबी, भुखमरी और जातिगत अपमान को दर्शाते हैं, बल्कि सामंती व्यवस्था, जमींदारी प्रथा और धार्मिक पाखंड के कारण उनके साथ हुए अन्याय को भी उजागर करते हैं। 'सदगति', 'कफन' और 'ठाकुर का कुआँ' जैसी उनकी कालजयी रचनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि कैसे सामाजिक संरचना ने मनुष्य की मूलभूत गरिमा और स्वतंत्रता को छीन लिया।
प्रेमचंद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे इन पात्रों को केवल पीड़ित के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उनके भीतर छिपी मानवीय जिजीविषा, असंतोष और कभी-कभी प्रतिरोध की भावना को भी सामने लाते हैं। यह संकलन पाठक को झकझोरता है और समाज के 'निम्नतम' कहे जाने वाले वर्ग के प्रति संवेदना, आत्म-निरीक्षण और गहरे सामाजिक बदलाव की माँग करता है। यह प्रेमचंद की सामाजिक चेतना और भारतीय यथार्थवाद को समझने के लिए एक अनिवार्य साहित्यिक दस्तावेज है।
ISBN
9789374764725
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
25.11.2025
Antall sider
466