Gå direkte til innholdet
Nasheele Padaarthon Ka Baadashaah Aur Usakee Khuraaphaaten
Spar

Nasheele Padaarthon Ka Baadashaah Aur Usakee Khuraaphaaten

Forfatter:
Hindi

रमेश जी जम्मू-कश्मीर जैसे अहिन्दी भाषी प्रांत के एक प्रतिष्ठित हिन्दी कवि हैं। उनकी रचनाएं आस-पास के समाज से उपजी हैं। उनकी रचनाएं मन का द्वार खटखटाती नहीं अपितु सीधी अंतस में जा उतरती हैं। उनका काव्य अनुभूतियों, संवेदनाओं, वात्सलय, रहस्यवादी चिंतन का काव्य है । कवि उस समाज की बात करता है जिसका स्वयं वह हिस्सा है। वह बड़ी सहजता और अपनी रचनाओं, भावनाओं से पाठक को रू-ब-रू करता है।
जहां मानवीय संवदेना, भूख-प्यास और मानसिक पीड़ा है, वहां आत्म-सम्मान और खुद्दारी के सजीव चित्र भी आपको मिलेंगे-
"आसमान हूँ, सूरज की रोशनी
अपने साथ लिये चलता हूँ मैं"
या फिर
"मैं समुद्र हूँ गहरा
बहुत कुछ समेटे हुए।
बरगद का पेड़ हूँ,
अपने में वक्त लपेटे हुए।"

Forfatter
Ramesh Arora
ISBN
9789356846630
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
27.4.2023
Antall sider
154