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Mann Ki Ankhen Khol
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Mann Ki Ankhen Khol

Forfatter:
Hindi
आचार्य सुदर्शन एक विचारक हैं। जीवन के पूर्वकाल में जीविकास्वरूप शिक्षक की भूमिका का निर्वहन करते हुए इन्होंने देश-विदेश में मूलतः शिक्षा और नैतिकता का प्रचार-प्रसार किया है। शिक्षक होने के कारण वे चाहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति नैतिक आचरण करें ताकि परिवार, समाज और राष्ट्र का नैतिक विकास हो। विशेषकर नई पीढ़ी के बच्चों में जीवन जीने की विधि और जीवन जीने की कला के विविध आयामों को वे उनके जीवन में उतारने के पक्षधर हैं। यही कारण है कि आज पूरे देश में ये वरिष्ठ शिक्षाविद् संत के रूप में जाने जाते हैं।
आचार्यश्री की अब तक शिक्षा एवं जीवन जीने की विधि पर सत्तर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हीं पुस्तकों एवं प्रवचनों में से राष्ट्रीयस्तर के सम्मानित पत्र-पत्रिकाओं एवं अखबारों ने समय-समय पर कुछ अंश प्रकाशित भी किया है, जिससे लाखों पाठकों को लाभ हुआ है। उन्हीं पाठकों के पुनः अनुरोध पर हम पत्र-पत्रिकाओं एवं अखबारों में प्रकाशित अंशों को आधार बनाकर इस साहित्य को प्रकाशित कर रहे हैं। इसके लिए हम पुनः सभी पत्र-पत्रिकाओं का आभार प्रकट करते हैं।
प्रस्तुत साहित्य 'ऐसी करनी कर चलो' आचार्यश्री के उन्हीं छोटे-छोटे प्रकाशित अंशों को पुस्तक रूप में प्रकाशित किया गया है। आशा है, हमारे सुधी पाठकों को इन अमूल्य संदर्भों से जीवन को अधिक-से-अधिक नैतिक बनाने की प्रेरणा मिल सकेगी।
Forfatter
Sudarshan Ji
ISBN
9788128830112
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
1.6.2012
Antall sider
248