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Khoyi Huyi Chijon Ka Pata
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Khoyi Huyi Chijon Ka Pata

सालों पहले खो गयी मेरे बचपन की तस्वीर जिसे मैं कहीं रख कर भूल गया था, अचानक एक दिन माँ को मिल जाती है। माँ ने तस्वीर दिखाते हुए कहा कि, "खुद ही चीजें रखकर भूल जाते हो और कहते हो कि चीज खो गयी।" अचानक मुझे ध्यान हुआ कि हम चीजों को खोते नहीं, बस उन्हें रखकर कहीं भूल जाते हैं। धीरे-धीरे हम उन्हें याद करना बंद कर देते हैं। एक समय के बाद वह भूलना इतना स्थायी हो जाता है कि लाख कोशिशों के बाद भी वह चीज याद नहीं आती और अंत में हम उस चीज को खो जाने का नाम दे देते हैं। माँ की कही हुई उसी बात की कोख से इस किताब का जन्म हुआ।
ISBN
9788196148805
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
28.8.2024
Antall sider
122