
Bonsai Nahin...Bargad Hun Main (??????? ????...???? ??? ???)
शिल्प की दृष्टि से भी काव्य विविधागामी है इसमें रसों की नदियां नहीं, अपितु भावों के छींटे हैं जो कहीं-कहीं तो तपते लोहे पर पड़ी ठंडी बूंद से चटक कर मन की आक्रोशाग्नि को प्रज्वलित करते हैं, तो कहीं चंदन मिट्टी बूंद से मन को शीतल सुरभित भी बनाते हैं। कवयित्री की भाषा पर भी अप्रतिम पकड़ है। सटीक शब्द और उनके सुगढ़ पर्यायवाची चंद पंक्तियों में ही भावों की अथाह पीड़ा को साकार करने में सक्षम हुए हैं। मुक्त छंद की मस्त धारा में प्रवाहित यह काव्य वास्तव में अद्वितीय है यथार्थ में मां सरस्वती की अपूर्व अनुकंपा है कवयित्री पर। मां शारदे के नामारुप कवयित्री शारदा का काव्य अपने-आप में संपूर्ण एवं अतुलनीय है। भविष्य में भी वे और भी गहन काव्यानुभूतियों का सृजन करती रहें इन्हीं शुभकामनाओं के साथ।
- Forfatter
- Mittal Sharda
- ISBN
- 9789354865534
- Språk
- Hindi
- Vekt
- 304 gram
- Utgivelsesdato
- 4.7.2022
- Antall sider
- 122
