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Bandi Jeevan (Edition1st)
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Bandi Jeevan (Edition1st)

'बंदी जीवन' क्रांतिकारी सचिंद्रनाथ सान्याल द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण आत्मकथा है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमूल्य दस्तावेज मानी जाती है। यह पुस्तक न केवल सान्याल के व्यक्तिगत जीवन और संघर्षों का विवरण देती है, बल्कि उस समय के गुप्त क्रांतिकारी आंदोलनों और विचारधाराओं पर भी गहराई से प्रकाश डालती है।
इस पुस्तक में सान्याल ने अपने बचपन, शिक्षा और कैसे वे क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े, इन सभी घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया है। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के संस्थापकों में से एक थे और उन्होंने काकोरी कांड जैसी कई प्रमुख घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई थी। 'बंदी जीवन' में उन्होंने जेल जीवन की कठिनाइयां, यातनाएं, और साथी क्रांतिकारियों के बलिदान की कहानियों को मार्मिकता से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक क्रांतिकारियों की देशभक्ति, त्याग और निडरता का सजीव चित्रण करती है।
'बंदी जीवन' को सिर्फ एक आत्मकथा नहीं, बल्कि एक वैचारिक गाइड के रूप में भी देखा जाता है। इसने न जाने कितने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे बाइबिल के समान सम्मान दिया था, क्योंकि यह उन्हें क्रांतिकारी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती थी। यह पुस्तक उस दौर के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है और हमें यह बताती है कि कैसे कुछ बहादुर लोग देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार थे। यह आज भी हमें देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देती है
ISBN
9789371222037
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
23.8.2025
Antall sider
378