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Azadi Ka Mantra: Vande Matram (आज़ादी का मंत्र वंदे &#2
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Azadi Ka Mantra: Vande Matram (आज़ादी का मंत्र वंदे 

सन् 1875 का सूर्योदय एक ऐसे गीत को लेकर उदित हुआ जो अब कभी भी अस्त नहीं होगा। एक ऐसा गीत जिसने न केवल भारत वासियों को अपितु सारी दुनिया के मनुष्यों को मां की वंदना करने का एक संगीतमय मंत्र दिया। मां अर्थात मातृभूमि की वंदना। जिस धरती पर हमने जन्म लिया। वह भूमि जिसकी गोद में हर व्यक्ति अपनी जीवन यात्रा को पूरी करता है। वह जमीन जिसकी आबोहवा हमें सुकून देती है। उस मां की वंदना। पृथ्वी मां का कोई धर्म नहीं है। वह तो हर धर्म की जननी है। हम उसे प्रणाम करते हैं। आज डेढ़ सौ साल बाद भी हम उसी का गुणगान करते हैं और सदियों तक करते रहेंगे। मृत्युलोक में जन्मा कोई भी व्यक्ति बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता।
Undertittel
Vande Matram (¿¿¿¿¿ ¿¿ ¿¿¿¿¿ : ¿¿¿¿ ¿¿¿¿¿)
ISBN
9789374763094
Språk
Hindi
Vekt
204 gram
Utgivelsesdato
5.2.2026
Antall sider
170