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भारत के मिथकों, अनगिनत कहानियों और नैतिक महाकाव्यों के बावजूद भारतीय इतिहास एक ऐसा क्षेत्र रहा है, जिसमें व्यक्तित्व मौजूद नहीं है। सुनील खिलनानी की यह पुस्तक उस जनशून्यता को भर्ती है तथा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के अस्तित्व मैं आने की कहानी में मानव आयाम को जगह देती है। बहुत सुंदरता से चित्रित और गहराई इ शोध की गयी इस पुस्तक और इसके साथ ही बीबीसी रेडिओ 4 श्रंखला में खिलनानी पचास भारतीयों के जीवन का अन्वेषण कर रहे हैं, जिसमें आध्यात्मिक बुद्ध से लेकर पूंजीवादी धीरूभाई अम्बानी तक मौजूद हैं - ये जीवन भारत के समृद्ध, विविधतापूर्ण अतीत और उसके विचारों के सतत विकास को उजागर करते हैं। खिलनानी द्वारा किया गया शहंशाहों, योद्धाओं, दार्शनिकों, कवियों, सितारों और कॉर्पोरटे जगत के असाधारण व्यक्तित्वों (उनमें से कुछ तो प्रसिद्द हैं और कुछ को विस्मृत कर दिया गया है) का प्रभावी वर्णन भावनाओं, व्यंगपूर्ण हास्य और उन सामाजिक दुविधाओं की गहराई को सामने लाता है, जो प्राचीन काल से लेकर आज तक मौजूद रही हैं । भारत और उसके अतीत की यात्रा करते हुए खिलनानी मात्र इतिहास ही नहीं बल्कि उससे भी अधिक जानकारी हमारे सामने लाते हैं। रॉकेट लॉन्च और आयुर्वेदिक कॉल सेंटर में, बस्तियों के मंदिरों और बॉलीवुड स्टूडियो में, कैलिफ़ोर्निया के समुदायों और कीचड़ भरे बंदरगाहों में वे उन स्त्री-पुरुषों की निरंतर और अक्सर आश्चर्यजनक प्रसंगिकता का पता लगाते हैं, जिन्होंने भारत और विश्व को आकर दिया। ये कहानियाँ पाठकों को जानकारी देंगी, प्रभावित करेंगी और उनका मनोरंजन करेंगी।
Undertittel
Bharat Ke 50 Aitihasik Vyaktitva
ISBN
9789389143782
Språk
Hindi
Vekt
310 gram
Utgivelsesdato
10.11.2019
Antall sider
422