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Forfatter:
pocket, 2022
Hindi

About the Book:

दोहों में परधान डॉ. जे. पी. बघेल की 15वीं प्रकाशित रचना-कृति है। इसमें 1026 दोहे संकलित हैं। संकलन के दोहों में धर्म, समाज, संस्कृति, इतिहास, परंपरा, त्योहार, पर्यावरण, व्यवस्था और किसान-मजदूर आदि को लेकर तीखी टिप्पणियाँ हैं। इन दोहों की भाषा तत्सम हिंदी है, शिल्प उत्कृष्ट है, शैली सम्मोहक है तथा वैचारिक धार तीखी है। उनके गीत, कविता व लेखों की तरह ही, इस संकलन के दोहे गहन गवेषणा से निसृत वैचारिकी के संप्रेषक हैं।

सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों में परंपरागत विरोधाभासों पर कवि की प्रखर अभिव्यक्ति झकझोरती है। सरकारों द्वारा की जा रही जन-सरोकारों की उपेक्षा को कवि ने परधान के रूपक में पिरोकर दोहों में खंडकाव्य जैसी रचना कर दी है। 'सूली पर इतिहास' शीर्षक के अंतर्गत कवि ने एक आपराधिक घटना को नए दृष्टिकोण से देखा है। कवि डॉ बघेल के दोहों के तेवर आकर्षित करते हैं और पाठकों के विवेक को जगाने की क्षमता रखते हैं।

डॉ. जे. पी. बघेल के दोहे इक्कीसवीं सदी में रहीम और कबीर की कथ्य परंपरा के वाहक हैं। दोहों में 'परधान' की व्यंग्यात्मक उपस्थिति इन दोहों को 'दोहों में परधान (प्रधान)' होने का संकेत करती है।

Forfatter
J P Baghel
ISBN
9789394603523
Språk
Hindi
Vekt
200 gram
Utgivelsesdato
27.5.2022
Antall sider
150