Siirry suoraan sisältöön
  1. Kirjat
  2. Englanninkieliset kirjat

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177,80 €

उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए न तो पूंजीवाद सक्षम है न ही मार्क्सवाद । संपूर्ण विश्व एक विकल्प की खोज में है। यदि गांधीवाद को समग्रता से लागू किया जाए तो वर्तमान समय की ज्वलंत समस्याओं बेरोजगारी, संसाधनों का । असमान बंटवारा, मानवाधिकारों का उल्लंघन, आतंकवाद और गरीबी का समाधान तलाशा जा सकता है। गांधीवादी विकल्प की ध्वनि न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में इस मुद्दे पर किए जा रहे विचार-विमर्श में सुनी जा सकती है। इस पुस्तक में गांधी और उनके विचारों को पुनर्व्याख्यापित करने का प्रयास किया गया है।यह पुस्तक पाठकों को गांधी और उनकी प्रासंगिकता को समसामयिक विश्व के संदर्भ में समझने में मदद करेगी। यह हाल में दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक स्तर पर लागू किए गए नए विषय गांधी अध्ययन को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है। यह पुस्तक अनुसंधानकर्ता, नीति निर्माताओं और विश्वविद्यालयों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी।