
Ras Pravah
ऐसा कहते हैं कि गुरु स्वयं शिव हैं और शिव स्वयं गुरु हैं। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरी जी के द्वारा प्रदत्त यह नाम "रस प्रवाह" उन्हीं का सामर्थ्य है।
"रस प्रवाह" जीवन की हर स्थिति में गुरु की प्रति पल सूक्ष्म उपस्थिति का गायन है।
- Alaotsikko
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- Kirjailija
- Harshita Soni
- ISBN
- 9789390504107
- Kieli
- Hindi
- Paino
- 95 grammaa
- Julkaisupäivä
- 16.2.2021
- Kustantaja
- diamond pocket books pvt ltd
- Sivumäärä
- 74