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Hum Jalawatan
Tallenna

Hum Jalawatan

pokkari, 2022
Hindi
नब्बे के दशक की आधुनिक कश्मीरी कविता का एक युगांतरकारी आयाम उसकी निर्वासन-चेतना है । इतने दशकों बाद आज भी इधर के निर्वासित कालखंड में कश्मीरी कविता के केंद्र में जलावतनी उसका मुख्य समकालीन वस्तु-सत्य बना हुआ है।अपनी भूमि से बिछोह,जनसंहार की दारुण स्मृतियाँ,घृणा की राजनीति,कैंपों में पशुओं जैसी ज़िन्दगी,अस्तित्व और अस्मिता के प्रश्न,अनदेखी, एक जीती- जागती सनातन संस्कृति के विलोपन की आशंका जैसी विचलनकारी चिन्ता इन निर्वासित कश्मीरी कवियों का वर्ण्य-विषय है।आधुनिक कश्मीरी कविता के इस पहलु को समझने के लिए हमें यह पता होना चाहिए कि यह निर्वासन-चेतना आर्थिक बाध्यताओं,प्राकृतिक आपदाओं,विकास के कारण हुआ विस्थापन न होकर आस्था विशेष के नाम पर हुए जेनोसाइड (जनसंहार) के चलते घटित हुई है।हालाँकि संवेदना के स्तर पर सभी तरह के विस्थापनों की पीड़ा की भावभूमि एक सी होते हुए भी आधुनिक कश्मीरी कविता में केंद्रीय भाव-बोध के आयाम भिन्न हैं। इन कश्मीरी कविताओं के रचनाकार पाकिस्तान समर्थित जेहादी आतंकवाद,अलगाववाद के चलते बेदखल कर दिए गए कवि हैं। संसार को विदित है कि कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित अलगाववाद, जेहादी हिंसाचार,घृणा की राजनीति के चलते कश्मीर के मूल निवासी लाखों कश्मीरी हिन्दुओं को सुनियोजित ढंग से मातृभूमि से आस्था के आधार पर बेदखल कर जलावतनी में धकेला गया।आज इतने दशकों बाद भी उस जेनोसाइड की दारुण स्मृतियाँ रोंगटे खड़े करती हैं।पारंपरिक संस्कृतिमूलक जीवन- शैली,परस्पर सौहार्द, मित्रताएं,सहअस्तित्व को धत्ता बताते जेहादी विमर्श ने लोगों के पाँवों तले की ज़मीन ही छीन ली। निर्वासन-चेतना की ये समकालीन कश्मीरी कविताएं संघर्षरत् देशज शरणार्थियों की आहत भावनाओं का दस्तावेज़ तो है ही,ये कविताएं एक गम्भीर सामाजि
ISBN
9789355004109
Kieli
Hindi
Paino
213 grammaa
Julkaisupäivä
1.1.2022
Sivumäärä
178