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Gyarah Kkahaniyan : Premchand
Tallenna

Gyarah Kkahaniyan : Premchand

हिन्दी साहित्य के सम्राट प्रेमचंद की रचनाएँ सचमुच ही अपने आप में अद्भुत रोचकता और भावनाओं को समेटे हुए हैं।

उनकी लेखनी से उद्धृत प्रत्येक वाक्य उस वर्तमान समय की कसौटी पर खरा उतरता है। उनकी रचनाएँ बेहद सरल और सौम्य भाषा में हैं। प्रत्येक रचना पाठक के अंतरंग मन को छू जाती हैं। प्रेमचंद केवल एक मनोरंजक लेखन ही नहीं, अपितु वे हिन्दी और उर्दू भाषा में अपनी दक्षता के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यूँ तो उनकी प्रत्येक रचना पाठक के लिए अद्भुत है, परन्तु कुछ रचनाएँ अपनी अमर छाप छोड़े हुए हैं जैसे- 'बूढ़ी काकी' हमारे समाज में बुर्जुगों के साथ हो रहे अपमानजनक व्यवहार को प्रकट करती है। इसी तरह 'समस्या', 'सवा सेर गेहूँ', 'बड़े भाई साहब' 'ईदगाह' कहानी एक ऐसे बाल मन को पाठक तक पहुँचाती है, जो उम्र में है तो छोटा-सा पर विचारों से वह इतना बड़ा है कि अपनी उम्र से ज़्यादा के बालकों को भी अपनी सोच-विचार का दीवाना बना लेता है। और अपनी इच्छाओं को एक तरफ़ कर अपनी पालनकर्ता की जरूरत को पूरा करता है। इसी तरह प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी 'पूस की रात' में जहाँ एक ओर किसान की समस्याओं को दर्शाया गया है वहीं एक अमुख जानवर का मनुष्यों के प्रति प्रेम को भी दिखाया गया है। इस पुस्तक में दी गई सभी कहानियाँ पाठक को एक ऐसे परिवेश का दर्शन कराती हैं, जो ग्रामीण परिवेश के साथ-साथ हमारे आस-पास हो रही प्रत्येक घटनाओं की साक्षी हैं।

ISBN
9789356821675
Kieli
Hindi
Paino
310 grammaa
Julkaisupäivä
28.3.2023
Sivumäärä
114