पं. रामप्रकाश त्रिवेदी ज्योतिषाचार्य की दो पुस्तकें 'ज्योतिष के रहस्य' तथा 'फलित ज्योतिष के रहस्य' डायमंड प्रकाशन नई दिल्ली से सन् 2008 तथा सन् 2009 में प्रकाशित हो चुकी हैं। ये दोनों पुस्तकें पाठकों के बीच इतनी लोकप्रिय हैं कि उनकी बधाई के संदेश तथा धन्यवाद ज्ञापन निरन्तर प्राप्त हो रहे हैं। पाठकों की सम्पत्ति, प्रेरणा तथा पुस्तकों की उपादेयता को ध्यान में रख कर ही इस नई पुस्तक की रचना का विचार लेखक के मन मस्तिष्क में उठा। यह पुस्तक उन सभी सुधी पाठकों की ज्योतिष संबंधी शंकाओं का निराकरण करने के लिए लिखी गई है जिनकी ज्योतिष जैसे जटिल तथा रहस्यमय विषय में रुचि है।
लोक कल्याण की पवित्र भावना को सामने रखकर जन-जन तक इस प्राचीन विद्या का प्रचार- प्रसार लेखक का पवित्र दायित्व बनता है। इस लक्ष्य को पाने में लेखक कहां तक सफल हुआ है, इसके निर्णायक तो स्वयं ज्योतिष के विद्वान तथा पाठक ही हैं।