इस पुस्तक में मानवशास्त्रीय सिद्धांत के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करने का प्रयास किया गया है। मानवशास्त्रीय सिद्धांत की आरंभिक अवस्था पर प्रकाश डालने के अलावा, इस पुस्तक में शास्त्रीय सांस्कृतिक उद्विकासवाद सिद्धांत, प्रसारवाद सिद्धांत, अमरीकी मानवशास्त्र, फ्रेंच मानवशास्त्र, ब्रिटिश मानवशास्त्र, मैक्स वेबर की विरासत, संज्ञानात्मक मानवशास्त्र, सांस्कृतिक नवउद्विकासवाद, सांस्कृतिक पारिस्थितिकी एवं सांस्कृतिक भौतिकवाद, जैवकृत मानव विज्ञान, सांकेतिक एवं व्याख्यात्मक मानवशास्त्र और राजनीतिक मानवशास्त्र पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें आधुनिकता को स्थापित करने वाले सिद्धान्तों, उत्तर–आधुनिकता को स्थापित करने वाले सिद्धान्तों, उद्योग एवं उत्तर-उद्योगवाद और वैश्वीकरण की प्रक्रिया का भी विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक में लेखक द्वारा कोई नवीन अवधारणा एवं सिद्धांत का दावा नहीं किया गया है। वरन विभिन्न विद्वानों द्वारा हिन्दी एवं अंग्रेजी में लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन कर शास्त्रीय एवं नवीन मानवशास्त्रीय सिद्धांतों को एक पुस्तक के अंदर एकत्रित करने का प्रयास किया गया है ताकि मानवशास्त्र के विद्यार्थी मानवशास्त्रीय सिद्धांत की उत्पत्ति एवं वर्तमान अवस्था को सरलतापूर्वक समझ सकें। इस पुस्तक को छात्रोपयोगी बनाने का हर संभव प्रयास किया गया है तथा नवीन यू.जी.सी. पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।