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Aitbaar
Tallenna

Aitbaar

Kirjailija:
pokkari, 2018
Hindi
वो जिसके नाम से लज्ज़त बहुत है उसी के ज़िक्र से बरकार बहुत है अभी सूरज ने लैब खोले नहीं हैं अभी से धुप में शिद्दत बहुत है मुझे सोने की क़ीमत मत बताओ में मिट्टी हूँ मेरी अज़मत बहुत है किसी की याद में खोये रहेंगे गुनहगारों को ये जन्नत बहुत है उन्हें मसरूफ़ रहने का मरज़ था उन्हें भी आजकल फ़ुरसत बहुत है कभी तो हुस्न का सदक़ा निकालो तुम्हारे पास ये दौलत बहुत है ग़ज़ल खुद कहके पढ़ना चाहते हो मियाँ इस काम में मेहनत बहुत है डॉ अंजुम बाराबंकवी बुनियादी तौर पर ग़ज़ल के शायर हैं I उनकी ग़ज़लों मैं सागर को गागर मैं सामने का फ़न है और सूफ़ियत भी वे इतिहास और वर्तमान को तुलनात्मक दृष्टि से देखते हैं, साथ ही वे परिवर्तन के पक्षधर भी हैं, और यथास्थिति के विरुद्ध आक्रोश उनकी लिखावट मैं स्पष्ट महसूस किया जा सकता है अंजुम यथार्त की भावभूमि पर खड़ा हुआ कल्पनाओं के तार बुनने वाला बाँका शायर है उनकी अवलोकन और निरीक्षण की क्षमता अदभुत है इनकी रचनाओं में अवध की तहज़ीबों की झलक भी मिलती है और ज़िन्दगी के सभी रंगों का रास भी
ISBN
9789388241021
Kieli
Hindi
Paino
163 grammaa
Julkaisupäivä
5.11.2018
Sivumäärä
122