Siirry suoraan sisältöön
Aarogya Dohawali
Tallenna

Aarogya Dohawali

Kirjailija:
pokkari, 2022
Hindi
अञ्जनी अमोघ जी को एक श्रेष्ठ कवि के रूप में जानता था, किन्तु वे आयुर्वेद के इतने मर्मज्ञ है यह स्वरूप उनका मैं इस 'आरोग्य-दोहावली' कृति से देख रहा हूँ। योग प्राणायाम,आसन संग आहार व औषधियों का उनका कितना गहन अध्ययन है यह उनकी इस अनूठी कृति से दृष्टिगोचर होता है। पहले वैद्यों को भी कविराज कहा जाता था क्योंकि अधिसंख्य नुस्खे पद्य में होते थे क्योंकि उन्हें याद करना अत्यंत सुगम होता था। मुझे आज भी दन्त-चिकित्सा का यह दोहा जो मैं बचपन में किसी वैद्यकीय-पुस्तक में पढ़ा था वह याद है- त्रिफला, त्रिकुटा, तूतिया, पाँचों नमक पतंग। दॉंत वज्र सम होत हैं, माजू फल के संग।। इसी तरह के प्रयोग श्री अमोघ जी ने अपनी इस पुस्तक में किये हैं। योग प्राणायाम एवम् आसन से कठिन विषय को दोहा छंद में आपने अत्यंत सरल तथा सहज भाषा-शैली में बड़ी आसानी से समझाया हैं। जिसे सुनकर अनपढ़ व्यक्ति व कम पढ़ा लिखा व्यक्ति भी सुगमता पूर्वक स्मरण कर सकता है। पारंपरिक वैद्यकीय पुस्तकों की भाँति लिखी गई यह पुस्तक इस हेतु भी अनूठी है, क्योंकि इसमे योग प्राणायाम, आसान एवम् औषधियों के अतिरिक्त आहार के विभिन्न घटकों को जोड़ा गया जिसे पढ़कर व अपने जीवन में उतार कर कोई भी व्यक्ति स्वयं अपना उपचार कर विभिन्न रोगों से मुक्ति पा सकता है। योग के अंतर्गत मर्कटासन का वर्णन कितना बोधगम्य है- मर्कट-आसन नित्य हो, हल्का करता पेट। हाथों को खोलें अधिक, दाये-बायें लेट।।1।। जोड़-दर्द नितम्ब सहित, कमर-दर्द में लाभ। दस्त-क़ब्ज़ भी ठीक हो, अंग बने हेमाभ ।।2।। हलासन के लाभ बहुत सरल तरीके से दोहो में व्यक्त किए गये है अंग-अंग में लोच हो, आसन करे प्रभात। गर्दन-हड्डी ठोस हो, शीश-दर्द दे मात।।1।। अग्न्याशय बेहतर हो, तन भागे मधुमेह। हल-आसन को कीजिए, रोग न आये देह।।2।। गोमुख आसन की विशेषता निम्न शब्दों मे
Kirjailija
Anjani Amogh
ISBN
9789391531867
Kieli
Hindi
Paino
259 grammaa
Julkaisupäivä
22.9.2022
Sivumäärä
198