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?????? (Gelha)
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?????? (Gelha)

Författare:
pocket, 2021
Hindi
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गेल्हा सरोवर है, स्थावर है, किन्तु सजीव है। परमात्माकृत चराचर जगत सजीव है और संसार में संतुलन स्थापित करते हुये उसका संसरण करने में लगा हुआ है। प्रकृति का कण-कण सोद्देश्य है। रामानुज अनुज ने इसे भलीभाँति जानकर तथा ह्रदयंगम कर उपन्यास के रूप में रचा है। 'गेल्हा' अभूतपूर्व जीवनीपरक एवं संस्मरणात्मक उपन्यास है जो प्रकृति एवं मानव में समन्वय स्थापित करता है। इसमें सरोवर के जल की पावनता है, चहुँ दिशि तट की स्मृतियाँ हैं। गेल्हा के आदेशानुसार उपन्यासकार ने भीट के शिलाखण्ड के नीचे से जो ग्यारह पन्ने प्राप्त किये हैं, वास्तव में वही उपन्यास के स्त्रोत हैं। लिखने की यह विधि वस्तुतः कथानक को अत्यधिक विश्वसनीय बना देती है। रामानुज अनुज के उपन्यास जूजू, मैं मौली, कैसी चाहत, झुके हुए लोग, मंगला, अपुन पेट बोल रए हैं, जमूरा लीक छोड़कर नूतनता की मौलिक सृष्टि करते हैं। इस दिशा में गेल्हा उच्चतर स्थान का पात्र है। प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत-साहित्य की भाँति ही गेल्हा में भी प्रकृति का सम्पूर्ण मानवीकरण है। 'गेल्हा' को नायक बनाकर रामानुज अनुज ने उपन्यास की दुनिया में क्रांति की है, साथ ही साथ अपने सम्पूर्ण जीवन को अपने शिक्षकों, गेल्हा-सन्निकट वासी पावन-जीवन, सहज परोपकारकारी एवं तपोमय जीवन व्यतीत करने वाले ग्रामीणों को शब्दांजलि प्रस्तुत कर कृतकृत्य कर लिया है।
ISBN
9789390889952
Språk
Hindi
Vikt
195 gram
Utgivningsdatum
2021-01-01
Sidor
162