Gå direkt till innehållet
Yogiraj Arvind
Spara

Yogiraj Arvind

Författare:
Hindi
जहां दूसरे लोग देश को एक जड़ वस्तु, कुछ मैदान, जंगल, पहाड़ और नदी समझते हैं, वहां मैं अपने देश को अपनी माता मानता हूं। मैं उसकी पूजा करता हूं और मां की भांति उसकी भक्ति करता हूं। जब कोई राक्षस मां की छाती पर बैठ कर उसका खून चूस रहा हो तो उस समय उसका पुत्र क्या करेगा ? क्या वह चुपचाप अपने खान-पान में लगा रहेगा और अपने परिवार के साथ मौज मनाता रहेगा? या इसके बदले में मां को बचाने के लिए दौड़ पड़ेगा ? मैं जानता हूं कि इस पतित जाति को उठा सकने की सामर्थ्य मुझमें है। यह कोई शारीरिक सामर्थ्य नहीं, और मैं तलवार या बन्दूक लेकर भी लड़ने नहीं जा रहा, यह तो ज्ञान की शक्ति है। क्षत्र तेज ही शक्ति का एकमात्र तेज नहीं है, ब्रह्म तेज भी है, वह तेज ज्ञान के ऊपर प्रतिष्ठित है।
Författare
Ashok Kaushik
ISBN
9788189182137
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
2005-06-01
Sidor
160