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Vedant Darshan
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Vedant Darshan

भारतीय चिंतनधारा के विकास में ऋग्वेदकाल के बाद षड्दर्शनों का अत्यंत महत्त्व है। जब हम परंपरा की बात करते हैं तो वेद, ब्रह्मसूत्र, उपनिषद् और गीता जैसे ग्रंथों से ही हमारा तात्पर्य होता है। क्योंकि परंपरा का अर्थ है जो हमारे पावत्र-आर्यग्रंथों में लिखा है। अतः पूरी भारतीय परंपरा को जानने के लिए दर्शनों का अध्ययन आवश्यक हो जाता है। इसीलिए हमने संक्षेप में और सरल भाषा में विभिन्न दर्शनों की व्याख्या प्रस्तुत की है।
ISBN
9788128818332
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
2024-01-01
Sidor
168