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Lok-Lay
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Lok-Lay

Författare:
Hindi
'लोक-लय' वाक्य पढ़ने-सुनने में जितना सहज लगता है, उतना है नहीं क्योंकि इसकी व्याप्ति बहुत व्यापक है। जहां लोक का अर्थ संसार और समाज है। वहीं लोक का अर्थ अवलोकन यानी देखना भी है। और इसी तरह लय का अर्थ जहां विश्राम-स्थल, आवास और संगीत की द्रुत, मध्य और विलंबित लय है वहीं लय मन की एकाग्रता भी है और अदर्शन की अनन्य भक्ति भी। और यही लय किसी चीज का विघटन और विनाश भी है। इसी लय से विलय और प्रलय है। और यही लय किसलय बन कर पल्लव और कोंपल भी है। इन अर्थों में तृप्ति मिश्रा की यह कृति 'लोक-लय' लोक के आलोक का ऐसा लयात्मक अवलोकन है जहां भक्ति के ललित लय में लोक का संगीत भजन के रूप में निवास करता है। निश्चित ही यह कृति परंपरा तथा अतीत की लुप्त-विलुप्त हो रही अद्भुत लोक धरोहर को वर्तमान के प्रांगण में सजाने-संवारने का एक ऐसा महती सारस्वत अनुष्ठान है, जिसका कि समय सापेक्ष समाज में आस्थामयी अभिनंदन अवश्य ही होगा। तथास्तु
Författare
Tripti Mishra
ISBN
9789390287635
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
11.8.2020
Sidor
174