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Jack London Ki Lokpriya Kahaniyan
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Jack London Ki Lokpriya Kahaniyan

Författare:
Hindi

एक बार फिर उसने चारों ओर दृष्टि घुमाकर देखा, यह बहुत हर्षदायक नजारा नहीं था। चारों ओर एक धुँधली आकाशरेखा था। सारे पहाड़ नीचे थे। कहीं पर भी कोई पेड़, झाड़ी या घास नहीं दिख रही थी। यहाँ तो केवल विशाल और भयंकर अकेलापन था, जिससे उसके अंदर एक भय की लहर सी दौड़ गई थी।

वह दुधिया पानी में थोड़ा झुक गया, जैसे कि वह विशाल जलधारा उसके ऊपर ही चढ़ी आ रही थी और उसको निर्दयता से कुचले दे रही थी, उसकी सुषुप्ति से। वह बहुत जोर-जोर से हिलने लगा, जैसे उसको दौरा आ गया हो और उसकी बंदूक हाथ से छूटकर गिर पड़ी। वह अपने भय से लड़ा, अपने को सीधा किया तथा पानी में अपनी बंदूक खोजने लगा और फिर उसे पुनः वापस पा लिया। उसने अपने बैकपैक को बाएँ कंधे की ओर कर लिया, जिससे उसके घायल टखने को कुछ आराम मिल सके। फिर वह धीरे-धीरे दर्द से सिकुड़ते हुए आगे तट की ओर बढ़ने लगा।

-इसी पुस्तक से

जैक लंडन ने बहुत सारे साहसिक अभियान किए, जिससे नदी, पहाड़, जंगल और जंगल के जीवों ने उनकी कहानियों में प्रमुखता से स्थान बना लिया। उनकी ये कहानियाँ साहस और रोमांच से भरपूर हैं, जो पाठकों को रोमांचित कर देती हैं।

Författare
Jack London
ISBN
9789355212146
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
2022-12-01
Sidor
176