'हिन्दी स्वयं शिक्षक' पुस्तक उन पाठकों के लिए वरदान साबित होगी जिनका हिन्दी में हाथ तंग है। कहने का तात्पर्य यह है कि जिन्हें हिन्दी कम आती है और जाने अनजाने उनसे लिखने-पढ़ने में गलतियाँ होती रहती हैं, जिन्हें कठिन शब्दों को समझने में परेशानी होती है। उन सभी के लिए यह पुस्तक 'हिन्दी स्वयं शिक्षक' एक दोस्त, सहयोगी व गाइड बनकर उनकी हिन्दी सुधारने में सहायक सिद्ध होगी। अनेक स्कूली छात्र व अधिकारी अपनी हिन्दी सुधारना चाहते है, पर उन्हें सही शिक्षक या गाइड नहीं मिलता। यह पुस्तक अपने आप में हिन्दी ज्ञान का भंडार है जो आपकी हिन्दी सीखने में दिन-प्रतिदिन सहायता करेंगी।
हमें यह याद रखना है कि हिन्दी हमारी भाषा ही नही हमारी पहचान भी है। अतः हमें हिन्दी बोलने व लिखने में झिझकना नहीं चाहिए । हमें अपने अंदर हिन्दी बोलने में तुच्छ महसूस नही होना चाहिए, बल्कि अपनी भाषा में बात करने पर हमें गर्व होना चाहिए।