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Biru: Itihas ke Sath Vichar Yatra  (Edition1st)
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Biru: Itihas ke Sath Vichar Yatra (Edition1st)

बीसवीं शताब्दी के अंतिम चतुर्थांश से लेकर इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भ के वर्षों की कालावधि में भारत में जो हुआ वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। इतिहास का पहिया इस समय अवधि में जितनी तेजी से घूमा उतनी तेजी से इससे पहले कभी नहीं घूमा था। इस तेजी से बदलते हुए इतिहास के एक साक्षी और कर्मयोगी के माध्यम से इस परिवर्तन की दिशा, दशा और इंसानी दायित्व को समझने का प्रयास मैंने अपनी रचना बिरू - इतिहास के साथ विचार-यात्रा' में करने का प्रयास किया है।
उपर्युक्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के विकास की पृष्ठभूमि में उपन्यास के नायक बिरू की विचार-यात्रा और उसके परिणाम स्वरूप हुई विकास-यात्रा सुधी पाठकगण के सम्मुख है।
उदहारण के लिए इसी पुस्तक से "मानव-जीवन में वास्तविक विकास और सच्चा सुख तभी संभव है जब अज्ञानता का उन्मूलन हो, स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन मिले और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के साथ लोकतांत्रिक आदर्शों का पालन हो।"
ISBN
9789369391875
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
2025-01-28
Sidor
254