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ये किताब मेरी माँ को समर्पित है, उनकी ज़िंदादिली, जीने का जज़्बा उससे मुझे बहुत हिम्मत और जीने की आस मिली। माँ जिनसे भी मिलती उनसे दोस्ती हो जाती और जहां जातीं वहाँ आलम ख़ुशनुमा हो जाता। कुछ रचनायें उनके लिए लिखी हैं और कैसे उनके जाने की बाद, जीवन में उतार चढ़ाव रहा। माँ बहुत कवितायें और शायरियाँ लिखती थीं तो ये किताब भी उन्हीं के लिए है जिसमें कुछ मेरे संगीन ख़याल माँ के गुज़र जाने के बाद और कैसे आगे जीवन और रिश्तों के हर पहलू को समझ के, ज़िंदगी आगे भाड़ी उसी कुछ एहसास को, ख़यालों को इस किताब में पिरोया है। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी जितना मुझे लिखने में आनंद आया।
ISBN
9789360948399
Språk
Hindi
Vikt
310 gram
Utgivningsdatum
1.4.2024
Sidor
64